मुख्यधारा में लौटे 40 माओवादी बन रहे आत्मनिर्भर, चौगेल कैंप बना ‘कौशलगढ़’

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अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो जीवन में कोई भी राह कठिन नहीं होती। इस कथन को साकार कर दिखाया है उन आत्मसमर्पित माओवादियों ने, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, और आज वही हाथ हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

राज्य शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित कैंप में ‘हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे युवाओं को आजीविका मूलक प्रशिक्षण देकर उन्हें नया जीवन मिल रहा है।

आजीविका से जुड़ने का अवसर

कभी माओवादी गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

चौगेल कैंप बना ‘कौशलगढ़’

वर्षों तक नक्सल हिंसा से जूझता रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित बीएसएफ कैंप परिसर को ‘कौशलगढ़’ के रूप में विकसित किया गया है।

यहाँ समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण के साथ-साथ कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा भी दी जा रही है। 20-20 के बैच में निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

ड्राइविंग सीखने की इच्छा हुई पूरी

चारपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण ले रहे श्री मनहेर तारम (40 वर्ष) ने बताया कि दो सप्ताह से उन्हें ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्टेयरिंग, क्लच, ब्रेक और एक्सीलरेटर के सही उपयोग की जानकारी प्रशिक्षकों द्वारा दी जा रही है।

इसी तरह श्री नरसिंह नेताम भी फोरव्हीलर ड्राइविंग सीख रहे हैं, जबकि 19 वर्षीय सुकदू पद्दा, जो निरक्षर हैं, पिछले तीन महीनों से प्रशिक्षण लेकर आजीविका से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

सिलाई, शिक्षा और आत्मविश्वास

19 वर्षीय कु. काजल वेड़दा ने बताया कि उन्हें बचपन से सिलाई सीखने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो रही है। साथ ही वे प्राथमिक शिक्षा का भी लाभ ले रही हैं।
कैंप में रह रहे अन्य आत्मसमर्पित माओवादी — जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मंडावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम सहित सभी अपनी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयाँ तथा मनोरंजनात्मक गतिविधियाँ जैसे कैरम, खेल और वाद्य यंत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आगे और भी मिलेंगे अवसर

पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी श्री विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी और स्वरोजगार आधारित अन्य पाठ्यक्रमों में भी प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।

निष्कर्ष

राज्य शासन द्वारा दिए जा रहे अवसर आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। हिंसा छोड़कर हुनर अपनाने वाले ये युवक-युवतियाँ अब आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।