GKछत्तीसगढ़

‘पुष्प की अभिलाषा’ के रचनाकार, श्री माखनलाल चतुर्वेदी

माखनलाल चतुर्वेदी (4 अप्रैल 1889-30 जनवरी 1968) सरल भाषा व ओजपूर्ण भावनाओं के रचनाकार माखनलाल चतुर्वेदी की कविताओं में देशप्रेम, प्रकृति व प्रेम का अनूठा चित्रण है. राष्ट्रीयता उनके काव्य का कलेवर और रहस्यात्मक प्रेम उसकी आत्मा है. हिमकिरीटीनी, हिमतरंगिणी, युग चर, समर्पण, बीजुरी जैसी कई लोकप्रिय रचनाएँ हैं. कवि पं. माखनलाल चतुर्वेदी पर अंग्रेजी ने

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अरपा महोत्सव 2023, गौरेला पेंड्रा मरवाही

हर साल की तरह इस साल भी जिला प्रशासन द्वारा  गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के स्थापना दिवस पर 10 फरवरी को अरपा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जीपीएम जिले के गठन की तीसरी वर्षगाठ पर अरपा महोत्सव का मुख्य अयोजन किया जा रहा है। अरपा महोत्सव के उपलक्ष्य में जन

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10 फरवरी भूमकाल स्मृति दिवस

भूमकाल दिवस आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए 10 फरवरी 1910 को अमर गुंडाधुर जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन किया था। आदिवासियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजों का डटकर सामना किया। उनकी याद में प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को भूमकाल दिवस मनाया जाता है।

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टाईगर किंड चेन्दरू

ग्राम गढ़बेंगाल के ‘चेन्दरू मण्डावी बस्तर अंचल के हॉलीवुड के पहले हीरो के तौर पर जाना जाता है इन्होंने स्विीडिस फिल्म में कार्य किया है।

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सिरपुर महोत्सव ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता का केंद्र

सिरपुर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के तट स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। इसका प्राचीन नाम श्रीपुर है यह एक विशाल नगर हुआ करता था तथा यह दक्षिण कोशल की राजधानी थी। सोमवंशी नरेशों ने यहाँ पर राम मंदिर और लक्ष्मण मंदिर का निर्माण करवाया था। ईंटों से बना हुआ प्राचीन लक्ष्मण मंदिर आज

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मावली देवी मंदिर, तरपोंगा, रायपुर

रायपुर में शिवनाथ नदी के तट पर स्थित मावली देवी मंदिर स्थली है। इस मंदिर में महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा मावली माता के रूप में पूजित है। मावली माता मंदिर, सिंगारपुर, बलौदाबाजा बलौदाबाजार जिले के सिंगारपुर में स्थित मावली माता के मंदिर में माना जाता है की ब्रह्मा, विष्णु और महेश की इच्छा से माउली माता

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छेरछेरा “मां शाकंभरी जयंती” तिहार

छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में गहरी जड़ें जमाए हुए कई पर्व और उत्सव हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देते हैं। इनमें से एक प्रमुख और विशिष्ट पर्व छेरछेरा है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़

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